अन्धकारको दूर करनेके लिए अपनी प्रकाशकी शक्तिको पहचानो:


महावाक्य: जो अपनी प्रकाशकी शक्ति को पहचानता है वो ये बातको अच्छी तरह जानता है की अन्धकार कायमी नहीं रहता| इसी पहचान होने के कारण उसको ये अंदरही विश्वास होता है की वो नकारात्मक रूपी अन्धाकारको दूर कर सकता है| इसी सोचसे वो अन्धकारको सकारात्मकता दूर करनेका से अंत तक प्रयत्न जारी रखता है|

अनुभूति: अन्धकारको दूर करनेके लिए जब में ये सत्य जानते हुये अन्धकार को दूर करनेके लिए मैं ये प्रकाश को अपनेमें फैलाता रहता हूँ और मुझे ये विश्वास हो जाता है की नकारात्मक का अन्धकार जरूर दूर होगा| और मुझे इसकी सतत लगाना लगी रहती है| मैं विघ्नोंसे परेशान नहीं होता, किन्तु मुझे ये अनुभूति होती हैउस में हराकदामा परा सदैव वृद्धि और प्रगति ही होती रहती है|

आत्माकी खुराक: दुनियाको बदलनेके लिए ध्यानयोग:(चालु)11-12-२०११:कल हमने ये देखाथा की किस तरह से ध्यानयोग दुनियाको परिवर्तित करनेका एक माध्यम है| इसके लिए निमित्त होते हुए जो कर्म हम दूसरोंके साथ व्यवहारमें ये प्रयुक्ति होनी चाहेये| अंदरसे एक रूहानी फूल बनानेका सतत पुरूषार्थ होना चाहिए| तब मुझे भी रूहानी फूल बनके शुभभावना और दिव्या गुणों की खुशबु फैलानी है| दूसरोंको देखते हुए उनकी आंखोको नहीं बल्कि उनके मस्तिष्क बीचोबीच रहनेवाला ज्योतिबिंदु जोकि असलमें प्रेम,शान्ति,आनंदऔर शक्ति स्वरूप है और अकालमूर्त है (जिसे नकभी काल या मृत्यु खा सकता है)| ऐसी में आत्मा ईसा शरीर द्वारा अन्य आत्मा से बात करा रही हूँ| और ऐसी ही रूहानी द्रष्टि शक्तिशाली किरणें अन्य आत्माओंके ऊपर फैंक रही हूँ|

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