मनका गीत

हम सब है आतम सजनिया और हमारा शिव सजन सबका एकही;
ये दुनिया है पिहरघर जाना है अपने ससुराल एकदिन …हम सब है आतम सजनिया
लेने आये है शिव साजन ज्ञान-गुण रत्नों का भंडारी;
करके जाना है शृंगार साथ उसके सजनी;
पुकारती थी कई सदियोंसे वाट निहारती थी अपने साजनकी
अबतो कराले शृंगार उससे साथ है जिनके..
शिवसाजन आया है खुद ले जाने अपने साथ…
अमृत वेले जिससे रोज़ मिलन मनाती थी;
रूहानी बातों में खो जाती थी;
मीट जायेगी सब तेरी आनी जानी ;
पार करने नाव आया है शिव खेवैया तेरी..
तीनो जहाँ के वो मालिक ठहरे तू है जिनकी सजनी..
तूतो कितने सुखभरे सपने लिए चली..शिव साजन आया है
देख चली तेरी नाव उसपार जो थी बीच भंवर में मिली अनहद खुशी..
जिसे बयान किया नहीं जाती…
ऐसी कहानी तेरी प्रीतकी.
अब तो पार हो जायेगी ये विषय वैतरणी..
हम सब है आतम सजनिया और हमारा शिव सजन सबका एकही

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